“पुरस्कार उपहार नहीं, जिम्मेदारी है” – नीलोत्पल मृणाल से खास बातचीत

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बात-मुलाकात- अतिथि हैं चर्चित लेखक नीलोत्पल मृणाल मीडिया मिरर की साप्ताहिक साक्षात्कार श्रृंखला बात मुलाकात में इस बार अतिथि हैं युवा लेखक नीलोत्पल मृणाल। जिन्हें हाल ही में साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार मिला। ये पुरस्कार नीलोत्पल को उनकी किताब डार्क हॉर्स के लिए मिला है। नीलोत्पल ने दिल खोलकर शानदार तरीके से जवाब दिए। नीलोत्पल की पहली किताब डार्क हॉर्स को छापने से कई प्रकाशकों ने मना कर दिया। पर नीलोत्पल ने हार नहीं मानी और जब डार्क हॉर्स छपी तो प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के लिए नामित हुई।

नीलोत्पल का परिचय:- मूलरूप से दुमका राँची झारखण्ड से हैं। सेंट ज़ेवियर्स कॉलेज रांची व जेएनयू से पढ़े हैं। फिलवक्त दिल्ली में आईएएस की तैयारी कर रहे हैं। लोकगायक हैं। पहली किताब लिखी डार्क हॉर्स और लेखन जगत में छा गए। डार्क हॉर्स को साहित्य का प्रतिष्ठित साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार हिंदी श्रेणी में दिया गया।

क्या ख़ास:- नीलोत्पल बहुत ज़िद्दी भी हैं और प्रतिभावान भी। एक बार एक लोक गायिकी की प्रतियोगिता में पहुंचे। चूँकि प्रतियोगिता ब्रज भाषा में थी और नीलोत्पल भोजपुरी में गाते हैं। सो इन्हें प्रतियोगिता में शामिल होने के लिए अंदर मंच पर ही नहीं जाने दिया गया। तो नीलोत्पल जहाँ खड़े थे वहीँ गाना शुरू कर दिया। अंततः उनको अंदर भेजा गया। फिर क्या नीलोत्पल ने जमकर गाया और वहां मौजूद जज मालिनी अवस्थी की नज़र में आ गए। जो आजतक उनके प्रिय हैं। इतना ही नहीं डार्क हॉर्स किताब का विमोचन भी मालिनी अवस्थी ने किया।

नीलोत्पल की बातचीत के मुख्य अंश

(आईएएस की तैयारी कर रहे छात्रों के जीवन की यथार्थता को समझना है तो डार्क हॉर्स जरूर पढ़ें: नीलोत्पल)

(पुरस्कार एक उपहार नहीं जिम्मेदारी है: नीलोत्पल)

(प्रकाशक पैसे लेकर छापने को तैयार थे किताब: नीलोत्पल)

नीलोत्पल मृणाल से विशेष बातचीत की
मीडिया मिरर के सम्पादक प्रशांत राजावत ने

सवाल 1, सबसे पहले साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के लिए आपको बधाई। और सबसे पहले यही बताइये की आपकी किताब डार्क हॉर्स लोगों को क्यों पढ़नी चाहिए।

उत्तर 1-धन्यवाद।भारत की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा की तैयारी करने वाले छात्र छात्राओँ की रोचक दुनिया,उनके संघर्ष,उनकी सफलता और असफलता से भरे जीवन का यथार्थ जानने के लिए डार्क हॉर्स पढ़ा जा सकता है।संघर्ष से तपती भट्टी मेँ जल कर खाक तो कुछ तप कर सोना हुए बांकुरोँ की दुनिया पढ़ने के लिए डार्क हॉर्स ले सकते हैँ आप। इस जमात पर डार्क हॉर्स शायद पहली मुकम्मल किताब है।बाकि आपकी मर्जी,:-)

सवाल 2, आपकी किताब डार्क हॉर्स को हिंदी श्रेणी में साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार के लिए नामित किया गया। क्या कुछ बदला इस पुरस्कार के बाद आपके जीवन में।

उत्तर 2-पुरस्कार एक उपहार नहीँ,एक जिम्मेदारी है जिसे निभाने की जिम्मेदारी बढ़ गई है।आशा है ठीक से निभा पाऊँ।

सवाल 3, साहित्य अकादमी युवा पुरस्कार अगर डार्क हॉर्स को नहीं मिलता तो आपकी नजर में किस किताब को मिलना चाहिए था। मेरा मतलब डार्क हॉर्स तो आपकी किताब है। इसके अलावा इस वर्ष कौन सी हिंदी किताब आपकी नजर में सर्वश्रेष्ठ है।

उत्तर 3-जी डार्क हॉर्स को मिला,निश्चित रूप से अच्छा लगा,पाठकोँ को भी अच्छा लगा।अब पूछा ये जाय कि,इसे ना मिलता तो किसे मिलता?इसके उत्तर के लिए शायद मैँ उपयुक्त आदमी नहीँ,क्योँकि ये तो पुरस्कार चयन करने वाली ज्युरी का अपना मामला है,उनके मानक हैँ।और मुझे ये भी ठीक से पता नहीँ कि,इस वर्ष और कौन कौन सी पुस्तकेँ दौड़ मेँ थीँ।अगर आप बता सकेँ और मैँने उन्हेँ पढ़ा हो तो कुछ बता पाऊँ।

सवाल 4, पुरस्कार के क्या मायने हैं आपके जीवन में, तब जब ये सर्वमान्य है की पुरस्कार बिकाऊ हैं। वाज़िब कम गैर वाज़िब ज्यादा मिलते हैं। सब जुगाड़ है।

उत्तर 4-हाँ ये सच है कि जुगाड़ की संस्कृति ने बहुत चीजोँ को कुप्रभावित किया है,केवल पुरस्कार नहीँ बल्कि स्कूल मेँ एडमिशन से लेकर कैबिनेट मेँ मंत्री पद तक जुगाड़ का खेल होता है पर इस एक कारण से सारी अच्छी या सच्ची चीजेँ खारिज नहीँ की जा सकती।जुगाड़ को हमेशा प्रतिभा और सच्चाई से चुनौती मिली है।मुझे खुशी है कि साहित्य अकादमी ने जुगाड़ संस्कृति को लात मार एक ऐसे लेखक को पुरस्कृत किया है जिसने साहित्य अकादमी का कार्यालय तक बस एक ही बार देखा है,वो भी बस उस दिन जिस दिन मैँ पुस्तक जमा करने गया था।अब आप ही आकलन करेँ कि मेरे जैसे नये लेखक और साहित्यिक मठगिरी मेँ खाँटी पिछड़े इलाके संताल परगना झारखंड से आये छात्र जीवन जी रहे लेखक का क्या जुगाड़ भिड़ सकता था,अगर ईमानदारी से चयन की प्रक्रिया ना हुई होती तो।ऐसे मेँ ये पुरस्कार ना केवल मेरे लिए बल्कि हिँदी जगत के लिए एक बड़ी घटना है,ये घटना जुगाड़ुओँ के मुँह पर तमाचा है और मुझे संतोष है कि तमाम विसंगतियोँ के बीच भी देश मेँ अभी कई संस्थाएँ हैँ जिन्होँने अपनी विश्वसनियता बहाल रखी है।

सवाल 5, डार्क हॉर्स पहले से चर्चा में थी और आप भी। पर यक़ीनन साहित्य अकादमी पुरस्कार की घोषणा के बाद ये चर्चा और बढ़ गई। चूँकि पुरस्कार की श्रेणी में आ गई तो अब पाठकों ने बिना पढ़े ही ये भी मान लिया। किताब अच्छी होगी। कैसे लेते हैं इस बात को की पुरस्कार का ठप्पा लगने के बाद एकाएक गुणवत्ता की मोहर लग जाती है। और पुरस्कार से पहले सब कुछ सामान्य।

उत्तर 5-जी देखिए,आपने कहा न कि डार्क हॉर्स पहले ही चर्चा मेँ है।सो मेरे लिए पुरस्कार तो तभी मिल गया जब इसे ख़ूब पाठक मिले और उनका प्यार मिला।और बिना पढ़े थोड़े पाठक इसे चर्चा मेँ लाते। हाँ साहित्य अकादमी मिलने से ये उन बड़े साहित्यकारोँ के नजर मेँ जरूर आ गया जिनकी नजर अक्सर नये और छोटे जगह से आये लेखकोँ पर नहीँ जाती है।बाकि पाठकोँ के प्यार ने जता दिया है कि डार्क हॉर्स कैसी है,साहित्य अकादमी ने भी पुरस्कार दे जता दिया कि डार्क हॉर्स कैसी है अब धीरे धीरे बड़े बुजुर्ग का भी आशीर्वाद मिल जाये,यही कामना करता हूँ।

सवाल 6, आप लोकगायक भी हैं। अच्छे वक़ता भी हैं। अब अच्छे लेखक भी। वाक़ई आप अपने को किस फॉर्मेट में सबसे अच्छा मानते हैं।

उत्तर 6-जी मेरा मानना है कि,जीवन आयु बहुत कम है और दुनिया बड़ी है,करने को कई काम हैँ,कई रास्ते।सो आदमी को जितना अधिक हो सके करने की कोशिश करनी चाहिए।बस ध्यान ये रखना है कि जो भी करेँ दिल से,ईमानदारी से करेँ।अब वो दो नाव मेँ पाँव वाली हिचकी और हिली सी कहावत भूल जायेँ।हम दोनोँ पाँव एक ही नाव मेँ रखेँगे पर नाव से उतरे तो कार भी चलायेँगे.ट्रक भी चलायेँगे,जहाज भी चलायेँगे।गाँव का आदमी हूँ कुदाल भी चलाऊँगा तो मन से चलाऊँगा।अब किस फार्मेट मेँ ठीक हूँ..ये देखने परखने वाले करेँगे।हम तो दिल से काम करेँ बस।

सवाल 7, कहते हैं बतौर लोक गायक आप पर मालिनी अवस्थी जी की नजर पड़ी। क्या घटनाक्रम था वो बताएँगे। क्या उनके साथ कोई लोकगायन में जुगलबन्दी अबतक।

उत्तर 7-जी,मालिनी अवस्थी जी का एक माँ के जैसा सदा पुत्रवत् स्नेह मिला है।तीन साल पहले अचानक एक दिन अखबार मेँ एक खबर पढ़ मैँ ETV के एक मशहुर प्रोग्राम फोक जलवा के लिए ऑडिशन देने मथुरा पहुँच गया।जब पहुँचा तो पता चला यहाँ केवल ब्रज भाषा वाले का ऑडिशन है और मैँ भोजपुरी वाला था।ऊपर से लंबी लाइन थी।बड़े मिन्नतोँ बाद वहाँ प्रोडक्शन टीम के मेँबर से कहा कि भैया एक बार बस मिला भर दीजिए मालिनी दीदी से,मिल के चले जायेँगे एक गीत सुना के,दूर झारखंड से आये हैँ,इतना करवा दीजिए।तब तक बाहर लाइन मेँ बैठे प्रतियोगी और उनके साथ आये लोग बारी का इंतजार करते करते बोर हो रहे थे.मैँने बाहर ही गाना शुरू कर दिया।भीड़ सुनने लगी।इतने मेँ एक टीम मेँबर संजय दुबे जी ने कहा कि आप जाईये महराज अंदर,एक बार सुना आईये।अंदर गया तो मालिनी जी को जब बताया कि झारखंड से आया हूँ तो चौँक गई कि “इतनी दूर आ गये?वो भी ब्रज वालोँ के बीच।चलो सुनाओ।”।मैँने एक सुनाया तो और सुनाने को कहा और फिर बोलीँ”भई तुम IAS की तैयारी करो,एक भी गाने की लिरिक्स सही और पुरी नहीँ तुम्हारी।आगे कैसे गाओगे?कहाँ से लाओगे गाना?सॉरी नीलोत्पल मृणाल”।ये सुन मुझे बाहर जाने का ईशारा हुआ और मैँ बाहर आ गया।दस मिनट के बाद अचानक मुझे अंदर से एक ने आवाज लगाई”ये अरे नीलोत्पल कौन है?चलो अंदर आओ भाई।मैडम बुला रही हैँ।मैँ माथा पकड़े बैठा था बाहर कि सुनते दौड़ा अंदर।अंदर मालिनी दीदी मुस्कुरा रही थीँ और बोलीँ”डर गये का बालक।देखो आवाज इतनी मीठी लगी कि तुम्हेँ आगे ले जा रही हुँ।आगे फाइनल ऑडिशन के लिए गाने तैयार करो जम के।उम्मीद है तुम ये कर लोगे।”।और तब से ऐसा आशीर्वाद लगा कि ना केवल मैँ चुना गया बल्कि मैँ फोक जलवा के फाईनल तक पहुँचा और रनर रहा।सबसे ज्यादा वेरायटी के गीत गाये।कई विधा उनसे सीखी।तब से आज तक ये सीखने का संबंध जारी है।आज वो मेरी अभिभावक हैँ।डार्क हॉर्स का विमोचन भी उन्होँने किया। ना बस गाने बल्कि मुझे लिखने को सबसे ज्यादा प्रोत्साहित किया।भाग्यशाली हूँ कि ऐसे लोग मिले जीवन मेँ कुछ सिखाने वालोँ मेँ।हाँ एक गायन मेँ जुगलबंदी जरूर चाहुँगा उनके साथ,जिसमेँ वो मेरे लिखे गीत गायेँ,एकाध मैँ भी गा लुँ।आपने ध्यान दिलाया।शुक्रिया।बात करता हुँ जल्द उनसे।

सवाल 8, डार्क हॉर्स आईएएस की तैयारी कर रहे युवाओं की कहानी है। क्या किसी आईएएस ने ये किताब पढ़ी। और पढ़ी तो कैसी प्रतिक्रिया दी।

उत्तर 8-हाँ कई IAS मित्रोँ ने पढ़ी और दूसरे को पढ़ने कहा।सच पूछिए वे तो मेरे स्टार प्रचारक हैँ डार्क हॉर्स के।मित्र हैँ सारे,अच्छा ही कहेँगे।उनकी मित्र मंडली का पहला साहित्यकार हूँ जिसने लेखन को चुना एक उपन्यासकार के रूप मेँ,ऐसे मेँ वे हमेशा हौँसला बढ़ाते ही बढ़ाते हैँ।कई IAS मित्रोँ को छपने के पहले पढ़ाया था.IAS मित्र मिथिलेश जी.अभिषेक जी,आस्तिक जी और अन्य मित्रोँ की तो टिप्पणियाँ भी हैँ किताब मेँ।

सवाल 9, मुखर्जी नगर जहाँ की गलियों और कूँचों में बसती है डार्क हॉर्स की धड़कन। वहां कितना दौड़ रहा है काला घोड़ा। यानि की कितनी लोकप्रिय है किताब।

उत्तर 9-अब मैँ क्या बोलुँ?यहाँ तो गर्दा उड़ गया है।यहीँ से तो दौड़ा असल मेँ ये घोड़ा।हर हर घोड़ा,घर घर घोड़ा टाईप है यहाँ छात्र छात्राओँ के लिए डार्क हॉर्स।इन छात्रशक्ति का कर्जदार हूँ।इनकी मुहब्बत ने ही तो इस मुकाम तक पहुँचाया कि आज साहित्य अकादमी अवार्ड के लायक बना।पर फिर भी,मुखर्जी नगर मेँ लोकप्रियता वाला पक्ष एक बार आप खुद से पता करेँ,आपको ज्यादा खुशी होगी वहाँ लोगोँ से बात कर।

सवाल 10, आईएएस की तैयारी कर रहे युवाओं को आधार बनाकर इसी वर्ष एक और किताब लिखी गई नॉन रेजिडेंट बिहारी। पढ़ी आपने।

उत्तर 10-जी हाँ,लेखक शशिकांत जी अच्छे लेखक हैँ।अफसोस के अभी कितबिया पढ़ नहीँ पाया हूँ।जल्द पढ़ बताता हूँ आपको।

सवाल 11, मुझे मालूम हुआ की डार्क हॉर्स को छपवाने के लिए दरियागंज के कई प्रकाशकों के दरवाजे आपने खटखटाये पर निराशा हाँथ लगी। क्या सच है ये।

उत्तर 11-जी एकदम सच है।भयंकर सच है।और इस सच पर “दर दर भटका दरियागँज” नाम से उपन्यास लिख रहा हूँ,ये भी सच है।

सवाल 12, हालाँकि दुनिया की सर्वश्रेष्ठ लेखिका हैरी पॉटर सीरीज जेके रोलिंग्स को भी 13 बार प्रकाशकों ने मना कर दिया था। मर्लिन जेम्स और मो यान के साथ भी ऐसा हुआ। बाद में इनकी कृतियाँ विश्व प्रसिद्ध हुई। क्या प्रकाशकों की न के बाद भी आप डार्क हॉर्स की प्रसिद्धि और गुणवत्ता को लेकर आश्वस्त थे।

उत्तर 12-जी.लाख प्रकाशक लौटाते गए पर भरोसा था डार्क हॉर्स पर।ज्यादा लंबा चौड़ा तो नहीँ पर बिक जायेगी,चल जायेगी,लोग सराहेँगे इतना भर तो सोच रखा ही था।

सवाल 13, मैं एक बड़ा बारीक़ और गंभीर मसला समझना चाहता हूँ की निश्चित ही डार्क हॉर्स एक उम्दा किताब। अब साहित्य अकादमी का अवार्ड मिलने की घोषणा के बाद ये बाद पुख्ता भी हो गई। पर ये प्रकाशकों का किताब प्रकाशन को लेकर क्या मानदंड, क्या पैमाने और समझ होती है की उनकी नजर में डार्क हॉर्स जैसी श्रेष्ट किताबें भी नहीं आती और प्रकाशक ऐसी किताबों को छापने से मना कर देते हैं। मामला वाक़ई है क्या। क्या वाक़ई प्रकाशक अब पारखी नहीं रह गए। वरना डार्क हॉर्स को छापने से प्रकाशक न क्यों करते।

उत्तर 13-अब इस पर मैँ क्या बोलूँ?प्रकाशक बेहतर बता पायेँगे उनका मानदंड।हाँ अधिकतर का एक जरूरी मानदंड ये भी था कि पैसा दो तो छाप देँगे पर मैँ ये मानदंड दंढ खा के भी नहीँ मानने वाला था सो बाकि मानदंड पर तो बात ही नहीँ की प्रकाशकोँ ने।एक ने तो कहा कि हिँदी के किताब का नाम शुद्ध हिँदी मेँ रखो तब सोचता हूँ पढ़ने का,और कहानी मेँ फेरबदल भी करता हूँ मैँ अपने हिसाब से,वैसे कहानी का टाईटल मैँ ही देता हूँ अपने प्रकाशन से आने वाली किताब का।मैँने अपनी निरीह किताब मेँ उस क्रांतिकारी प्रकाशक का इतना दखल देख तौबा कर लिया उससे और कहा आप दखल नाम से ही प्रकाशन खोल लिजिए,जब लेखक के लिखे और किये हर पन्ने पर आप ही को दखल देना है तो।एक को तो मेरा ही नाम अजीब लगा,कहा अपना नाम चेँज करके आईए,नीलोत्पल मृणाल टाईप नाम नये यूथ को बड़ा ऑड लगेगा।मैँने पापा को फोन किया कि नाम बदलवा दीजिए।वो बोले बेटा प्रकाशक बदल लो,साले अब कहाँ कहाँ नाम बदलवाऊँ?ये सुन इस प्रकाशक से भी बात ना बन पाई।ऐसे कई किस्से हैँ।

सवाल 14, क्या उन प्रकाशकों के नाम बताएँगे जिन्होंने आपको डार्क हॉर्स को छापने से मना किया। सम्भव हो तो नाम बताइये ताकि सार्वजनिक रूप से उनकी पारखी दृष्टी पर तमाचा लगे।

उत्तर 14-जी अब नाम क्या बताना,जवाब तो पाठक ने दे दिया है।रही सही कसर साहित्य अकादमी ने पूरी कर दी,पुरा आँख का ऑपरेशन कर दिया।अभी नाम बता के क्या होगा,खुद बेनकाब होँ तो बेहतर है और हो भी रहे हैँ।अगली बार नाम भी बता दूंगा।

सवाल 15, कई प्रकाशकों ने आपको न कहा। फिर आपको शब्दरम्भ प्रकाशन ने हाँ कहा। डार्क हॉर्स छपी। तहलका मचा दिया। पर ये स्थिति अगर शब्दरम्भ न मिलता तो आप क्या करते।

उत्तर 15-हाँ शब्दारंभ का आभार।अगर ये भी ना मिलते तो खुद छापता फिर।और क्या करता?कोई पब्लिकेशन खोलता”खारिज पब्लिकेशन” या “पीड़ित पब्लिकेशन” नाम से।

सवाल 16, प्रकाशकों और नए लेखकों में आपसी सामजस्य की कमी लगती है। क्या मानते हैं।

उत्तर 16-हाँ किताब की सफलता के लिए ये तालमेल जरूरी है।बड़े प्रकाशक बड़े लेखक से ताल बिठा पाते हैँ।हम नये लोग नये प्रकाशक संग तालमेल बिठा बेहतर कर सकते हैँ।दोनोँ का फायदा आपसी सामंजस्य पर ही निर्भर है।

सवाल 17, क्या डार्क हॉर्स सेल्फ पब्लिशिंग का हिस्सा है।

उत्तर 17-जिस तरह जमीन से लेकर सोशल मीडिया तक प्रचारित करने और बिकने मेँ मेरे मित्रोँ ने सहयोग दिया उससे कहिये ये “टीम पब्लिशिँग” का हिस्सा है।

सवाल 18, आपका अपना कोई पसंदीदा लोकगीत, कुछ पंक्तियाँ लिखिए।

उत्तर 18-झुलनी के रंग सांचा हमार पिया,ओही झुलनी पे गोरी लागा हमार जिया।।क्षिती जल पावक गगन समीरा,मिल के बनाये जग पांचा हमार पिया।।

सवाल 19, आईएएस की तैयारी अब भी कर रहे हैं। क्या नीलोत्पल को आईएएस के रूप में हम देख पाएंगे।

उत्तर 19-कोशिश जारी है।

सवाल 20, डार्क हॉर्स आपकी पहली किताब थी। क्या कुछ और किताबों की तैयारी हो रही है।

उत्तर 20-हाँ जल्द एक नया उपन्यास आ रहा ग्रामीण जीवन की जटिलता और रोचकता को लेके।

सवाल 21, पहली किताब के प्रकाशन के लिए आपको भटकना पड़ा। पर साहित्य अकादमी पुरस्कार के बाद अगली किताब छपवाने के लिए आपको भटकना न पड़ेगा। क्या मानते हैं आप।

उत्तर 21-शायद भटकना ना पड़े।वैसे प्रकाशक तो हैँ ही अभी मेरे पास।शब्दारंभ का साथ रहेगा अभी।हम संघर्ष के साथी हैँ।वैसे भी बड़े प्रकाशक दे ही क्या देँगे हिँदी के लेखक को।मुझे जो देगा ,पाठक देगा।वो किसी भी प्रकाशन से मिल जायेगा अगर रचना ठीक रही तो।

सवाल 22, अपना पसंदीदा कोई एक नया और पुराना लेखक बताइये। कोई एक किताब जो सबसे प्रिय हो।

उत्तर 22-जी पुराने मेँ प्रेमचंद और रेणु।इधर अमरकांत और श्रीलाल शुक्ल,परसाई और शरद जोशी।नये मेँ पसंद पुख्ता होने मेँ देर है।

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