विचारक एवं सेवानिवृत्त एडीजी सुश्री अनुराधा शंकर सिंह ने कहा कि पूरी दुनिया ने ईश्वर को सत्य माना, लेकिन अकेले महात्मा गांधी ने सत्य को ही ईश्वर कहा। यही कारण है कि गांधी आज भी और आने वाले समय में भी प्रासंगिक रहेंगे।
वे अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त रिसर्च जर्नल ‘समागम’ के 25वें वर्ष के अवसर पर आयोजित ‘ऋषि समागम व्याख्यान’ को संबोधित कर रही थीं। उन्होंने कहा कि यूरोप ने भारतीय मेधा का अपने हित में उपयोग किया और आवश्यकता समाप्त होते ही भारतीयों को दुनिया से बाहर करने की साजिशें रची जा रही हैं। एक समय भारतीय उनके आँखों का तारा थे, आज उन्हें गंदा कहकर अपमानित किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हम स्वयं को कंप्यूटर इंजीनियर समझते रहे, जबकि वास्तव में हम उनके लिए मजदूर की भूमिका में थे।
वरिष्ठ पत्रकार एवं राजनीतिक विश्लेषक श्री गिरिजाशंकर ने कहा कि हर नई चीज के साथ संभावनाओं के द्वार खुलते हैं और डिजिटल युग में भी यही हो रहा है। हालांकि उन्होंने चिंता जताई कि पहले आँखों देखी रिपोर्टिंग होती थी, अब कानों सुनी रिपोर्टिंग बढ़ रही है और आने वाले समय में “गूगल बाबा रिपोर्टिंग” भी आम हो सकती है।
वरिष्ठ पत्रकार डॉ. सुधीर सक्सेना ने कहा कि ऐसे कठिन समय में गांधी पर केंद्रित अंक का प्रकाशन अपने आप में साहसिक कदम है, जिसे ‘समागम’ बखूबी निभा रहा है। उन्होंने डिजिटल युग में संचार को लेकर बढ़ती यांत्रिकता को एक बड़ी चुनौती बताया।
कार्यक्रम के प्रारंभ में आधार वक्तव्य देते हुए ‘समागम’ के संपादक एवं वरिष्ठ पत्रकार श्री मनोज कुमार ने कहा कि जिस दिन समाज को पत्रिका की आवश्यकता नहीं रहेगी, उसी दिन इसका प्रकाशन बंद कर दिया जाएगा। उन्होंने इसे संघर्ष नहीं बल्कि आनंद की पत्रिका बताया।
कार्यक्रम को पारंपरिक स्वरूप से हटकर आयोजित किया गया, जिसमें किसी को मुख्य अतिथि या अध्यक्ष न मानते हुए सभी वक्ताओं को समान स्थान दिया गया। इसी अवसर पर लेखक संजय सक्सेना की पुस्तक ‘डायरी का आखिरी पन्ना’ का विमोचन किया गया।
‘समागम’ के 25वें वर्ष पर विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट योगदान के लिए अनेक विभूतियों को लोकमाता अहिल्या, स्वामी विवेकानंद, अभ्युदय समागम एवं स्वामी विवेकानंद युवा प्रतिभा सम्मान से सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम का संचालन पूर्वा शर्मा त्रिवेदी ने किया और आभार प्रदर्शन साहित्यकार श्री संजीव परसाई ने किया।



